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बिहार के प्राचीन इतिहास का स्वर्ण युग: रोचक तथ्य और ऐतिहासिक महत्व

 बिहार के प्राचीन इतिहास – गौरवशाली सभ्यता की धरती

बिहार भारत का वह प्रदेश है जिसने सदियों से भारत की संस्कृति, धर्म और राजनीति को दिशा दी है। बिहार के प्राचीन इतिहास इस बात का प्रमाण है कि यहाँ की भूमि ने कई महान साम्राज्यों और विचारों को जन्म दिया। किवदंती अनुसार, यह भूमि ज्ञान और धर्म की जननी रही है।
बिहार का प्राचीन इतिहास
  • मगध साम्राज्य और बिहार के प्राचीन इतिहास
       बिहार का सबसे पुराना नाम “मगध” था। बिहार के प्राचीन इतिहास में मगध साम्राज्य की महिमा का विशेष             उल्लेख मिलता है। यह साम्राज्य गंगा नदी के दक्षिणी तट पर फैला था और इसकी राजधानी पहले राजगृह  (राजगीर) थी। बाद में अजातशत्रु ने इसे पाटलिपुत्र (पटना) स्थानांतरित किया। किवदंती अनुसार, मगध की भूमि पर ही राजनीति, प्रशासन और युद्धनीति का पहला व्यवस्थित रूप विकसित हुआ। यही कारण है कि आज भी इतिहासकार बिहार को “भारत की राजनीति का पालना” कहते हैं।
  • बुद्ध और जैन धर्म का उदय –  बिहार के प्राचीन इतिहास का अध्याय
      बिहार के प्राचीन इतिहास का सबसे पवित्र अध्याय बौद्ध और जैन धर्म के उदय से जुड़ा है। भगवान गौतम बुद्ध ने गया (अब बोधगया) में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था। किवदंती अनुसार, जब बुद्ध ने बोधि वृक्ष के  नीचे ध्यान लगाया, तो पूरी धरती कुछ क्षणों के लिए शांत हो गई थी। इसी कारण बोधगया आज विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए तीर्थ स्थल है। इसी भूमि पर भगवान महावीर का जन्म हुआ, जिन्होंने जैन धर्म को दिशा दी। वेशाली (बिहार) में जैन धर्म का विकास हुआ, जिससे यह क्षेत्र “धर्म की भूमि” कहलाया।
  • मौर्य वंश और  बिहार के प्राचीन इतिहास का स्वर्ण युग
       मौर्य वंश ने बिहार के प्राचीन इतिहास को स्वर्ण युग दिया। चंद्रगुप्त मौर्य ने जब सत्ता संभाली, तब बिहार भारत  का सबसे शक्तिशाली केंद्र बन गया। उनके मंत्री चाणक्य (कौटिल्य) ने “अर्थशास्त्र” जैसे ग्रंथ की रचना की जो शासन की आधारशिला बना। किवदंती अनुसार, सम्राट अशोक जब कलिंग युद्ध में हिंसा देखकर विचलित हुए, तब उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया और बिहार को “शांति का प्रतीक” बना दिया। अशोक ने बिहार से ही अपने  दूतों को दुनिया के अलग-अलग देशों में धर्म प्रचार के लिए भेजा। इस तरह बिहार के प्राचीन इतिहास का प्रभाव एशिया तक फैल गया।
  • नालंदा और विक्रमशिला – बिहार के प्राचीन इतिहास में शिक्षा का केंद्र
      शिक्षा के क्षेत्र में भी बिहार के प्राचीन इतिहास का कोई मुकाबला नहीं है। नालंदा विश्वविद्यालय और  विक्रमशिला विश्वविद्यालय विश्व के सबसे पुराने और प्रसिद्ध शिक्षण केंद्र थे। किवदंती अनुसार, नालंदा में  लगभग 10,000 विद्यार्थी और 2,000 आचार्य एक साथ अध्ययन करते थे। चीन के यात्री ह्वेनसांग ने यहाँ की विद्या और अनुशासन की बहुत प्रशंसा की थी। आज भी जब नालंदा के खंडहरों को देखा जाता है, तो बिहार के प्राचीन इतिहास की महानता महसूस होती है।
  • गुप्त वंश – कला और संस्कृति का उत्कर्ष
     बिहार के प्राचीन इतिहास में गुप्त वंश का शासन “स्वर्ण युग” कहा गया है। इस काल में साहित्य, गणित, विज्ञान      और कला ने नई ऊँचाइयाँ छुईं। किवदंती अनुसार, महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने इसी भूमि पर शून्य (0) की खोज        की और खगोल विज्ञान में अद्भुत योगदान दिया। गुप्त काल में मूर्तिकला, स्थापत्य और संगीत ने बिहार को            सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाया।
  • मध्यकालीन बिहार के प्राचीन इतिहास
      गुप्त वंश के पतन के बाद भी बिहार के प्राचीन इतिहास में इसका महत्व कम नहीं हुआ। इस काल में यहाँ कई  सूफी संतों, कवियों और समाज सुधारकों ने जन्म लिया, जिन्होंने प्रेम, शांति और एकता का संदेश दिया। किवदंतियों में कहा गया है कि इस दौर में बिहार की मिट्टी में अध्यात्म और भक्ति का संगम हुआ।
  • आधुनिक काल में बिहार के प्राचीन इतिहास का प्रभाव
      ब्रिटिश शासन के दौरान भी बिहार ने देश को कई वीर और नेता दिए। चंपारण सत्याग्रह (1917) ने गांधीजी को  राष्ट्रपिता बनने की दिशा दी। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, जो भारत के पहले राष्ट्रपति बने, इसी बिहार की गौरवशाली  विरासत से निकले। बिहार के प्राचीन इतिहास ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी लोगों को प्रेरित किया और आज भी  यह प्रेरणा का स्रोत है।
  • किवदंती अनुसार – बिहार के प्राचीन इतिहास की आत्मा
      किवदंती अनुसार, बिहार की मिट्टी में ऐसी शक्ति है जो हर व्यक्ति को विनम्रता, बुद्धि और कर्म की प्रेरणा देती  है। बिहार के प्राचीन इतिहास केवल पुस्तकों में नहीं, बल्कि इसके लोगों, परंपराओं और संस्कृति में जीवित है।


निष्कर्ष

बिहार के प्राचीन इतिहास भारत की आत्मा का दर्पण है। यहाँ की हर ईंट, हर नदी और हर लोककथा अपने अंदर हजारों साल की सभ्यता समेटे हुए है। किवदंतियों में कहा गया है कि यह भूमि केवल इतिहास नहीं, बल्कि एक भावना है – जो ज्ञान, धर्म और संस्कृति की जड़ें मजबूत करती है।

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